Norway Chess: विजयी रथ पर सवार डी गुकेश, कार्लसन के बाद एरिगैसी को भी हराया

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ओस्लो। Norway Chess: भारत के मौजूदा विश्व चैंपियन डी गुकेश ने कुछ विपरीत परिस्थितियों से गुजरने के बाद हमवतन अर्जुन एरिगैसी को पहली बार क्लासिकल बाजी में हराया जिससे वह नॉर्वे शतरंज टूर्नामेंट के सातवें दौर के बाद दूसरे स्थान पर पहुंच गए। गुकेश की टूर्नामेंट में यह लगातार दूसरी जीत है। उन्होंने पिछले दौर में दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन को हराया था। इस 19 वर्ष के खिलाड़ी ने इस जीत से एरिगैसी से दूसरे दौर में मिली हार का बदला चुकता भी किया। गुकेश के अब 11.5 अंक हो गए हैं और उन्होंने नॉर्वे के गत चैंपियन कार्लसन को पीछे छोडक़र दूसरा स्थान हासिल कर लिया है। अमेरिकी ग्रैंडमास्टर फैबियानो कारूआना 12.5 अंक लेकर शीर्ष पर हैं। उन्होंने चीन के वेई यी को हराया।

गुकेश दूसरे स्थान पर कार्लसन तीसरे स्थान पर पहुंचे

कार्लसन एक अन्य अमेरिकी ग्रैंडमास्टर और विश्व के दूसरे नंबर के खिलाड़ी हिकारू नाकामुरा के खिलाफ आर्मागेडन में जीत के बाद 11 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर हैं। नाकामुरा 8.5 अंकों के साथ चौथे स्थान पर हैं। गुकेश से हार के बाद एरिगैसी 7.5 अंकों के साथ पांचवें स्थान पर खिसक गए, जबकि वेई यी 6.5 अंकों के साथ छठे स्थान पर हैं। Norway Chess टूर्नामेंट में अभी तीन दौर की बाजियां खेली जाने बाकी हैं। महिला वर्ग में, यूक्रेन की अन्ना मुजीचुक ने आर्मागेडन टाई-ब्रेक में दो बार की विश्व रैपिड चैंपियन कोनेरू हम्पी को हराया, जबकि भारत की एक अन्य खिलाड़ी आर वैशाली चीन की लेई टिंगजी से हार गई।

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ऐरिगेसी के खिलाफ भी गुकेश ने की ट्रेडमार्क वापसी

गुकेश ने कार्लसन के खिलाफ मैच की तरह Norway Chess के इस मुकाबले में ट्रेडमार्क वापसी की और सामरिक प्रतिभा का प्रदर्शन किया। बढ़ते दबाव में उन्होंने धीरे-धीरे सटीक गणना और मजबूत डिफेंस के साथ खेल में वापसी की। एक रोमांचक मोड़ पर गुकेश ने एरिगैसी को मिली बढ़त को बेअसर कर दिया। साथ ही गुकेश ने मैच में पेस बनाना शुरू किया। ऐसा ही उन्होंने कार्लसन के खिलाफ किया था। इससे एरिगैसी पर समय का दबाव बनता गया। जैसे-जैसे समय की परेशानी बढ़ती गई, एरिगैसी की चालों ने गुकेश को वापसी का पर्याप्त मौका दिया। इस मौके को गुकेश ने शानदार तरीके से भुनाया। गुकेश की शानदार तकनीक के आगे एरिगैसी को घुटने टेकने पड़े और उन्हें अंत में रिजाइन करना पड़ा।

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