England Tour of India : BCCI के फैसले से Cricket Associations नाराज

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BCCI के आयोजन स्थलों से भड़के कई राज्यों के Cricket Associations 

इंग्लैंड दौरे के मैचों की मेजबानी नहीं मिलने से बढ़ी नाराजगी

नई दिल्ली। अगले साल होने वाले इंग्लैंड क्रिकेट टीम के भारत दौरे के BCCI के कार्यक्रम को लेकर बवाल शुरू हो गया है। इंग्लैंड दौरे के मैच सिर्फ गुजरात, महाराष्ट्र और तमिलनाडु को ही मिलने से कई राज्यों के Cricket Associations भड़क गए हैं। उनका आरोप है कि यह उनके साथ भेदभाव है। बंगाल सहित कुछ क्रिकेट एसोसिएशन ने तो इसे लेकर सीधे बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली से बात कर उनसे अपनी नाराजगी जाहिर कर दी है।

Cricket Associations का कहना है कि गुजरात के मोटेरा को 7, पुणे को 3 और चेन्नई को 2 मैच आवंटित किए जाने का कोई औचित्य नहीं है। सभी राज्य संघ चाहते हैं कि उन्हें कम से कम एक मैच तो मिले। जब इस दौरे पर 4 टेस्ट, 5 टी20 और 3 वनडे खेले जाने हैं तो BCCI को उनका आवंटन सही तरीके से करना चाहिए था।

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मुंबई-बंगाल ने जताई BCCI से नाराजगी
BCCI अध्यक्ष सौरव गांगुली के होम ग्राउंड क्र्रिकेट एसोसिएशन आफ बंगाल के अध्यक्ष अभिषेक डालमिया और मुंबई Cricket Association ने अपने-अपने राज्यों की अनदेखी पर नाराजगी जताई है। डालमिया का कहना है कि उन्होंने इस मामले पर बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली से बात भी की है। वहीं एमसीए के सदस्य नदीप मेमन ने भी BCCI के इस फैसले पर सवाल उठाए हैं।

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पहले दिया था गांगुली ने संकेत
Mumbai Cricket Association के सदस्य मेमन ने कहा कि BCCI अध्यक्ष सौरव गांगुली ने पहले तो यही संकेत दिया था कि इंग्लैंड दौरे की मेजबानी मुंबई को भी मिल सकती है। मेमन ने गांगुली के 28 सितंबर के बयान के बारे में कहा, जिसमें गांगुली ने कहा था कि मुंबई और कोलकाता को इंग्लैंड दौरे की मेजबानी का मौका मिल सकता है क्योंकि सभी मैच बायो-बबल में होंगे। लेकिन अब बंगाल और मुंबई दोनों को ही इस दौरे से बाहर रहना पड़ा है।

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कई अन्य राज्य संघ भी नाराज
इंग्लैंड दौरे से अलग रखे जाने के BCCI के फैसले से कई अन्य राज्य संघ भी नाखुश बताए जा रहे हैं। कई संघों ने पुणे को मेजबानी देने के फैसले पर भी आश्चर्य जताया है। Cricket Associations का कहना है कि कोरोना के कारण क्रिकेट गतिविधियां बंद रही हैं। लंबे समय से मैचों का आयोजन नहीं हुआ है। अगर आगे भी इसी तरह से उन्हें मेजबानी से अलग रखा गया तो उन्हें गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ेगा। जिसका सीधा असर इन खेल संघों की गतिविधियों और खिलाड़ियों-स्टाॅफ को मिलने वाली सुविधाओं पर पड़ेगा।

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