स्पोर्ट्स इंडस्ट्री को 1800 अरब रुपए का नुकसान

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स्पोर्ट्स इंडस्ट्री में नए रूल्स-रेगुलेशंस की आहट

विकास शर्मा

जयपुर। कोविड-19 के असर से पूरी दुनिया सहमी हुई है लेकिन दुनिया की इकॉनमी में अहम भूमिका निभाने वाली स्पोर्ट्स इंडस्ट्री तो लगभग तबाही के कगार पर पहुंच गई है। इस दौरान अकेले क्रिकेट-टेनिस-फुटबॉल को ही करीब 1800 अरब रुपए का नुकसान हो चुका है। कोरोना के कहर के बीच क्रिकेट में आईपीएल से लेकर फुटबॉल में यूरोपियन लीग्स के स्वरुप को बदलने की तैयारी शुरू हो गयी है।

पिछले लगभग दो महीनों से दुनिया भर की स्पोर्ट्स एक्टिविटी बंद पड़ी हैं और अभी कम से कम दो महीने शुरू होने की भी कोई संभावना नहीं है। दुनिया भर की एजेंसियां तो अब यह आंकलन करने में जुटी हैं कि आखिर कोरोना ने इस इंडस्ट्री को नुकसान कितना पहुंचा दिया। एक अनुमान के मुताबिक सिर्फ फुटबॉल जगत को ही कोरोना लगभग 1500 अरब रुपए तक का नुकसान पहुंचा चुका है। ऐसे में अनुमान लगाया जा सकता है कि नुकसान का यह आंकड़ा कितना बड़ा है। अमेरिका, यूरोप और एशिया में भारत में अभी तक भी कोरोना पर काबू नहीं पाया जा सका है। हालांकि जर्मनी, फ्रांस, इटली और इंग्लैंड जैसे देश यह कह चुके हैं कि जुलाई तक खेल एक्टिविटीज को शुरू कर दिया जाएगा लेकिन सवाल यह है कि क्या ऐसा संभव हो सकेगा?

क्रिकेट-टेनिस-फुटबॉल में नुकसान का दायरा

कोरोना ने स्पोर्ट्स इंडस्ट्री की कमर तोड़कर रख दी है। बड़े टूर्नामेंट्स स्थगित होने के कारण, आयोजकों-प्रशासकों और क्रिकेट-टेनिस-फुटबॉल मैचों के कवरेज राइट्स खरीदने वाली दुनिया की नामचीन कंपनियों को भारी नुकसान हुआ है और इसका सीधा असर अब इन खेलों से जुड़े खिलाड़ियों और सपोर्टिंग स्टॉफ की नौकरियों पर पड़ने लगा है।

  •  यूरोपियन फुटबॉल को करीब 1500 अरब का नुकसान, सीधा असर खिलाड़ियों की कमाई पर।
  •  दुनियाभर की टीमों में खिलाड़ियों की ट्रांसफर फीस में जबर्दस्त कटौती की तैयारी।
  •  दिसंबर में भारत-ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट सीरीज नहीं हुई तो कंगारूओं को 13 अरब का नुकसान
  •  चालू क्रिकेट सत्र धुला तो इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड को करीब 35 अरब के नुकसान की आशंका
  •  आईपीएल स्थगित होने से बीसीसीआई सहित संबंधित पक्षों को करीब 3 हजार करोड़ का नुकसान
  •  ओलंपिक खेल स्थगित होने से जापान को करीब 41 हजार करोड़ रुपए का नुकसान 

आईपीएल से लेकर फुटबॉल में यूरोपियन लीग्स का बदलेगा रूप

कोरोना के असर से दुनिया कितनी बदलेगी, यह तो अलग-अलग देशों में चल रहे लॉकडाउन के खत्म होने के बाद पता चलेगा लेकिन स्पोर्ट्स पर इसका असर अभी से ही दिखने लगा है। दुनिया भर की स्पोर्ट्स अथॉरिटी किसी भी तरह से जुलाई से स्पोर्ट्स एक्टिविटीज को शुरू करने की हरसंभव कोशिशें करने में जुटी हैं। इसके लिए कोरोना से बचाव के उपाय करना भी जरूरी है, लिहाजा रूल्स-रेगुलेशन में बड़े पैमाने पर बदलाव किए जा रहे हैं। इंटरनेशनल फुटबॉल एसोसिएशन बोर्ड (आईएफबी) और फीफा ने मिलकर फुटबॉल के नए नियमों को तो अमलीजामा पहना ही दिया है। जिसके तहत टीमों को अब किसी भी मैच में 5 सब्स्टीट्यूट खिलाने की अनुमति दे दी गई है। वहीं दूसरी तरफ क्रिकेट में भी बदलाव की बयार बहने लगी है। आने वाले दिनों में मैच के दौरान बॉल को लार या पसीने से चमकाने के तरीके पर पूरी तरह पाबंदी लगने जा रही है। अब विचार सिर्फ इसी बात पर हो रहा है कि बॉल को चमकाने के लिए किस चीज का इस्तेमाल किया जाए। इंग्लैंड में बॉक्सिंग एरीना में बॉक्सर मास्क पहनकर रिंग में उतरते हुए दिखाई देने वाले हैं। इस संबंध में औपचारिक रूप से निर्णय किया जा चुका है। इसी तरह टेनिस में सोशल डिस्टेंसिंग के चलते डबल्स मैचों पर पाबंदी लग सकती है। संभावना है कि आने वाले दिनों में सिर्फ सिंगल मैच ही हों। सबसे ज्यादा परेशानी उन खेलों को लेकर है, जिनमें एक से अधिक खिलाड़ियों को मैदान पर उतारना मजबूरी है। कुश्ती, फुटबॉल और हॉकी जैसे मैचों के आयोजन को लेकर संशय की स्थिति है लेकिन इतना तो तय है कि इन सभी खेलों में भी नए नियमों की एंट्री सिर्फ समय की बात है।

आईपीएल नहीं होने का इकॉनमी पर भी पड़ेगा असर

स्पोर्ट्स एक्टिविटी बंद होने का सीधा असर देशों की इकॉनमी पर भी पड़ेगा। भारत की इकॉनमी में आईपीएल का भी अहम योगदान है। आईपीएल भारत की जीडीपी में 1300 करोड़ से अधिक का योगदान देती है। आईपीएल और अन्य क्रिकेटिंग इवेंट्स से भारत में टूरिज्म, एयरलाइन्स और होटल इंडस्ट्री सीधे तौर पर जुड़ी हुई हैं। इसके अलावा भारत जैसे देश में जहां क्रिकेट भी धर्म माना जाता है, बीसीसीआई और आईसीसी मैचों के प्रसारण अधिकार बेचकर ही मोटी कमाई करते हैं। इस पैसे का बड़ा हिस्सा खिलाड़ियों और स्टॉफ के साथ-साथ क्रिकेट के इंफ्रास्ट्रक्चर के डेवलपमेंट पर भी खर्च होता है। यही स्थिति फुटबॉल की यूरोप में है। लेकिन अब कोरोना ने इस पूरी चेन को ही टूटने के कगार पर पहुंचा दिया है। एक अनुमान के मुताबिक पूरे संसार में सीधे तौर पर स्पोर्ट्स से जुड़े करीब 20 लाख लोग बेरोजगार हो गए हैं, इनमें से अधिकांश को काम मिलने की अब संभावना भी नहीं है। स्पोटिंग इवेंट्स बंद होने का असर इवेंट मैनेजमेंट कंपनियों से जुड़े लाखों वर्कर्स पर भी पड़ा है, जो साल भर इन खेलों से जुड़े दूसरे इवेंट्स को ऑर्गेनाइज करते हैं।

स्पोर्ट्स इंडस्ट्री में प्लेयर परेशान, सपोर्टिंग स्टॉफ बेरोजगार

कोरोना का सबसे अधिक असर इमर्जिंग प्लेयर्स और सपोर्टिंग स्टॉफ के साथ-साथ उन लोगों पर ज्यादा पड़ा है, जो टूर्नामेंट्स के आयोजन से अस्थाई रूप से जुड़ते हैं। भारत का ही उदाहरण लें तो आईपीएल शुरू होने के बाद रणजी स्तर के उन खिलाड़ियों के पास भी पैसों की बारिश हुई, जो नेशनल टीम में आने का सपना देखते-देखते ही रिटायर हो जाते हैं। इमर्जिंग क्रिकेट प्लेयर्स को भारत में आईपीएल ने आर्थिक रूप से स्थायित्व दिया। कुछ ऐसी ही स्थिति प्रो कबड्डी, फुटबॉल की आईलीग और बैडमिंटन लीग में खेलने वाले नए खिलाड़ियों की भी है। इवेंट्स बंद होने से सभी के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी हर देश के ओलंपिक फेडरेशन को फाइनेंशियल मदद करती है, ये पैसा खिलाड़ियों की ट्रेनिंग और उनको मिलने वाली सुविधाओं पर खर्च होता है। अब ओलंपिक स्थगित होने के कारण कमेटी इस राशि में कटौती कर सकती है। यदि ऐसा हुआ तो ओलंपिक का कोटा हांसिल करने वाले खिलाड़ियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

जुलाई से एक्टिव मोड में आएगी इंडस्ट्री?

दुनियाभर में खेल फेडरेशन किसी भी हाल में क्रिकेट-टेनिस-फुटबॉल और दूसरे खेलों से जुड़ी स्पोर्टिंग एक्टिविटीज को जुलाई से शुरू करने की कोशिशों में जुटे हैं। इटली में फुटबॉल लीग की एसी मिलान जैसी टीमों के ट्रेनिंग कैंप शुरू कर दिए गए हैं। फार्मूला-1 भी जुलाई से ही अपनी लीग को शुरू करने पर विचार कर रही है। संभावना है कि जुलाई से ही क्रिकेट भी शुरू हो लेकिन मैचों का आयोजन खाली स्टेडियम में ही करवाने पर विचार किया जा रहा है। दुनियाभर कि क्रिकेट बोर्ड तर्क दे रहे हैं कि स्टेडियम खाली रहने से जो नुकसान होगा, उसकी भरपाई टीवी राइट्स बेचकर की जा सकती है। कुलमिलाकर दर्शकों को अभी स्टेडियम्स में लाइव मैच देखने के लिए इंतजार करना पड़ेगा। हालांकि इसमें भी एक पेंच है कि जुलाई में इवेंट्स शुरू करने से पहले खिलाड़ियों के प्रैक्टिस सेशन कहां और कैसे शुरू होंगे। क्योंकि अभी इस पर एकराय नहीं बन पा रही है कि कोरोना के इस असर के बीच ही खिलाड़ियों को ट्रेनिंग के लिए बुलाया जाए। प्लेयर्स में भी इस पर एकराय नहीं हैं और बिना ट्रेनिंग के मैदान पर उतरना संभव नहीं है। लेकिन जैसे भी है उम्मीद की जानी चाहिए कि कोरोना भी दूसरी महामारियों की तरह हारेगा। कहते हैं ना उम्मीद पर दुनिया कायम है….

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